युवा शक्ति ही समाज की सबसे बड़ी ताकत : युवा प्रदेश अध्यक्ष पंडित हरीश पाठक

युवा शक्ति ही समाज की सबसे बड़ी ताकत : युवा प्रदेश अध्यक्ष पंडित हरीश पाठक

युवा शक्ति ही समाज की सबसे बड़ी ताकत : युवा प्रदेश अध्यक्ष पंडित हरीश पाठक

Youth power is the biggest strength of the society: Youth State President Pandit Harish Pathak

भरतपुर। राष्ट्रीय परशुराम सेना ब्रह्मवाहिनी के राजस्थान युवा प्रदेश अध्यक्ष पंडित हरीश पाठक ने कहा कि किसी भी समाज का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी तय करती है। यदि युवा जागरूक, संस्कारित और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित हों, तो समाज के विकास को कोई शक्ति नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को केवल अपने व्यक्तिगत भविष्य तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र के उत्थान में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

पंडित हरीश पाठक ने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक ऐतिहासिक महापुरुष नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, साहस, आत्मसम्मान और न्याय के शाश्वत प्रतीक हैं। उनके आदर्श आज भी समाज को सही दिशा देने का सामर्थ्य रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब युवा भगवान परशुराम के त्याग, तप, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएंगे, तब एक सशक्त, संगठित और संस्कारित समाज का निर्माण होगा।

उन्होंने कहा कि समाज की मजबूती किसी एक व्यक्ति या पद से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, एकता, भाईचारे और सहयोग की भावना से होती है। आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति भेदभाव से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता दे। एकजुट समाज ही हर चुनौती का सामना करने में सक्षम होता है।

पंडित हरीश पाठक ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने चरित्र, व्यवहार और कर्मों से ऐसी पहचान बनाएं जो समाज के लिए प्रेरणा बने। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार, आधुनिकता के साथ भारतीय संस्कृति और सफलता के साथ सेवा का भाव ही जीवन की वास्तविक उपलब्धि है। जिस युवा के भीतर सेवा, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना होती है, वही समाज का सच्चा नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।

उन्होंने राष्ट्रीय परशुराम सेना ब्रह्मवाहिनी के राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन द्वारा उन्हें जो महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है, वह उनके लिए सम्मान के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। इस विश्वास पर खरा उतरने के लिए वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करेंगे तथा समाजहित को सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे।

अंत में पंडित हरीश पाठक ने कहा कि “समाज का उत्थान केवल भाषणों से नहीं, बल्कि संस्कार, सेवा, समर्पण और सकारात्मक सोच से होता है। जब युवा जागेगा, तभी समाज आगे बढ़ेगा और राष्ट्र विश्व में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।”

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