Gupt Navratri 2026: कल से शुरू हो रही है आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Gupt Navratri 2026: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई 2026, बुधवार से हो रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्रि को तंत्र-मंत्र साधना, देवी उपासना और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि आप भी इस वर्ष गुप्त नवरात्रि का व्रत रखने जा रहे हैं, तो जान लें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और जरूरी नियम।
Gupt Navratri 2026 Date
- प्रारंभ: 15 जुलाई 2026 (बुधवार)
- समापन: 23 जुलाई 2026 (गुरुवार)
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त और प्रातःकाल में कलश स्थापना करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- कलश स्थापना का शुभ समय: प्रातः 5:40 बजे से 10:20 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:58 बजे से 12:53 बजे तक (यदि प्रातः स्थापना संभव न हो)
नोट: स्थान और स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
गुप्त नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें?
- घर के पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें।
- लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
- मिट्टी के पात्र में जौ (जवारे) बोएं।
- कलश में गंगाजल, सुपारी, अक्षत, सिक्का और पंचरत्न (यदि उपलब्ध हों) रखें।
- आम के पत्ते लगाकर नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलश पर स्थापित करें।
- मां दुर्गा का ध्यान करते हुए दीपक जलाएं और विधि-विधान से पूजा करें।
- दुर्गा सप्तशती, देवी कवच या दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
गुप्त नवरात्रि का धार्मिक महत्व
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि को विशेष रूप से देवी साधना, मंत्र जाप, ध्यान और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन नौ दिनों में श्रद्धा और नियमपूर्वक मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है तथा सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है।
गुप्त नवरात्रि में रखें इन बातों का ध्यान
- सात्विक भोजन करें।
- घर और पूजा स्थल की स्वच्छता बनाए रखें।
- क्रोध, नकारात्मक विचार और असत्य से बचें।
- प्रतिदिन मां दुर्गा की आरती और मंत्र जाप करें।
- जरूरतमंद लोगों को भोजन या दान अवश्य दें।
निष्कर्ष
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 देवी आराधना, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक साधना का दुर्लभ अवसर है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर विधिपूर्वक मां दुर्गा की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई धार्मिक जानकारी सामान्य मान्यताओं और पंचांग आधारित विवरण पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों के पंचांगों में मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है। पूजा से पहले अपने स्थानीय पंचांग या योग्य आचार्य से पुष्टि अवश्य करें।